गोडावण – राजस्थान का राज्य पक्षी

Great Indian Bustard / गोडावण

  • गरेट इंडियन बस्टर्ड देश का सर्वाधिक संकटग्रस्त पक्षी है तथा राजस्थान सरकार इसकी आबादी को संरक्षित करने का प्रयास कर रही है|
  • आईयूसीएन रेड लिस्ट के अनुसार, वर्ष 1969 में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षी की आबादी लगभग 1,260 थी और वर्तमान में इनकी कुल संख्या अनुमानतः 200 से भी कम है।
  • जब भारत के ‘राष्ट्रीय पक्षी’ के नाम पर विचार किया जा रहा था, तब ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ का नाम भी प्रस्तावित किया गया था जिसका समर्थन प्रख्यात भारतीय पक्षी विज्ञानी सलीम अली ने किया था। लेकिन ‘बस्टर्ड’ शब्द के गलत उच्चारण की आशंका के कारण ‘भारतीय मोर’ को राष्ट्रीय पक्षी चुना गया था।
  • ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ भारत और पाकिस्तान की भूमि पर पाया जाने वाला एक विशाल पक्षी है।
  • यह विश्व में पाए जाने वाली सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षी प्रजातियों में से एक है।
  • ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ को भारतीय चरागाहों की पताका प्रजाति (Flagship species) के रूप में जाना जाता है।
  • इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम आर्डीओटिस नाइग्रीसेप्स (Ardeotis nigriceps) अथवा choriotis nigriceps है, जबकि मल्धोक, घोराड येरभूत, हुकना गोडावण, तुकदार, गगनभेर, गुयारिन, सोन चिरैया आदि इसके प्रचलित स्थानीय नाम हैं।
  • ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ राजस्थान का राजकीय पक्षी भी है,यहाँ इसे गोडावण नाम से भी जाना जाता है। इसे 1981 में राज्य पक्षी घोषित किया गया था।
  • वर्तमान में गोडावण जैसलमेर के मरू उद्यान, सोरसन(बारां) तथा सांकलिया क्षेत्र(अजमेर) में पाया जाता है।
  • ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की जनसंख्या में अभूतपूर्व कमी के कारण अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधन संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature and Natural Resources) ने इसे संकटग्रस्त प्रजातियों में भी ‘गंभीर संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) प्रजाति के तहत सूचीबद्ध किया है।

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