विज्ञान के अद्भुत तथ्य - Amzing Facts Of Science

आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई देता है?

सूर्य का श्वेत प्रकाश सात रंगों से मिलकर बना होता है| हम प्रकाश को तरंग ऊर्जा का रूप मान सकते हैं जिसमें विभिन्न रंगों का तरंगदैर्ध्य भिन्न-भिन्न होता है| इंद्रधनुष में मौजूद सात रंगों में लाल रंग का सबसे अधिक और नीले व बैंगनी रंग का तरंग दैर्ध्य सबसे कम होता है। नीले रंग का बिखराव लाल रंग की अपेक्षा अधिक होता है जिसके कारण आकाश नीला दिखाई देता है, यद्यपि क्षितिज की और नीला रंग कम होता जाता है क्योंकि क्षितिज से आ रहे प्रकाश को वायुमंडल में अधिक दूरी तय करनी होती है जिसके कारण अधिक बिखराव होता है और नीला रंग कम होता जाता है|

 

मछली को जल से बाहर निकालने पर वह क्यों मर जाती है ?

मछली जलीय प्राणी है यह गिल्स द्वारा श्वसन क्रिया करती है। गिल्स जल में घुली आक्सीजन को अवशोषित करके कार्बन डाई ऑक्साइड गैस बाहर निकालते है। मछली के थोड़ी देर के लिए जल से बाहर निकाल देने पर श्वसन क्रिया बंद हो जाती है अतः वह मर जाती है।

 

ढलता हुआ सूरज हमें लाल क्यों नजर आता है ?

जब सूरज ढल रहा होता है, तब रोशनी में मौजूद रंगों को हम तक पहुँचने के लिए काफी लम्बा रास्ता तय करना होता है| इस दौरान वायुमंडल में मौजूद धूल के कणों से प्रकाश का प्रकीर्णन होता है।नीले रंग का बिखराव कम तरंग दैर्ध्य के कारण सबसे अधिक होता है| नीले रंग के बिखर जाने के बाद सिर्फ लाल और नारंगी रंग ही बचते हैं जो हमारी आँखों तक सीधे पंहुचते हैं। और यही कारण है कि सूर्यास्त के समय आसमान में लाल रंग होता है और सूरज भी लाल नजर आता है।

 

पानी में रखी पेन्सिल मुड़ी हुई दिखाई क्यों देती है ?

पानी में कोई सीधी छड़ी तिरछी डाली जाए तो उसके डूबे हुए भाग का प्रत्येक बिंदु अपवर्तन के कारण अपनी वास्तविक स्थिति के ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है| जिससे पेंसिल मुड़ी हुई प्रतीत होती है| जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करता है तो अपवर्तित किरण आपतित किरण की अपेक्षा अभिलंब से दूर हटती है| इसी कारण पानी में तिरछी रखी हुई पेंसिल मुड़ी हुई दिखाई देती है |

 

पानी के पैंदे पर रखा सिक्का ऊपर उठा हुआ क्यों दिखाई देता है ?

पानी के पेंदे पर रखे सिक्के का ऊपर उठा हुआ दिखाई देने का प्रमुख कारण प्रकाश का अपवर्तन है| जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो पानी की सतह से अपवर्तित होकर आंखों तक पहुंचती है जिसके कारण पानी के पेंदे पर रखा सिक्का अपने मूल स्थान से कुछ ऊपर दिखाई देता है|



 

तारे टूटते हुए क्यो दिखाई देते है ?

अन्तरिक्ष में अनेकों बड़ी-बड़ी रचनाएँ उपस्थित है जो पृथ्वी से अरबों किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिन्हें हम तारों के रूप में देखते है। इनके अलावा कुछ पिंड जो पृथ्वी के पास आने पर वायुमंडल में प्रवेश करते है तो हवा की रगड़ से गर्म होकर जलने लगते है| इसे ही तारा टूटना कहते हैं| अधिकांश उल्कायें वायुमंडल में पूरी तरह जल जाती हैं लेकिन कुछ बड़ी उल्काएं पृथ्वी तक पहुँच जाती हैं उन्हें उल्कापिंड कहते हैं|

 

दिन में तारे दिखाई क्यों नही देते हैं ?

पृथ्वी के चारों ओर सघन वायुमंडल है जो सूर्य के प्रकाश के चारों ओर बिखेर देता है जिससे दिन में आकाश चमकदार हो जाता है तथा तारे दिखाई नहीं देते है जबकि चाँद पर जहाँ वायुमंडल नहीं है वहाँ दिन में भी तारे देखे जा सकते हैं।

 

पक्षी हवा में क्यों उड़ पाते हैं ?

पक्षियों में पंख होते हैं जो अग्रपाद के रूपांतरण होते हैं। इनकी हड्डियाँ खोखली तथा फेफड़ों में वायुकोष होते है जो शरीर को हल्का बनाते हैं। इस प्रकार शरीर के हल्केपन तथा पंखों की सहायता से पक्षी हवा में सरलता से उड़ पाते हैं।


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